प्राचीन हस्ताक्षर-चिह्न। नए सिरे से गढ़ा गया।
तमगा यूरेशिया के मैदानी लोगों का हस्ताक्षर और मुहर-चिह्न है। हर कुल का अपना विशिष्ट चिह्न होता था – मुहर से छापा जाता, पत्थर पर उकेरा जाता, सिक्कों पर ढाला जाता और अनुबंधों के नीचे लगाया जाता। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता, तमगा मूल, स्वामित्व और दिए गए वचन को चिह्नित करता था: पहचान पत्रों से बहुत पहले का हस्ताक्षर।
किर्गिज़ भाषा में हस्ताक्षर को आज भी „कोल तमगा" (кол тамга) कहते हैं – शाब्दिक रूप से „हाथ का चिह्न"। यही है Tamgara: आपका निजी चिह्न, जिसे आप उँगली की एक लकीर से किसी भी दस्तावेज़ के नीचे लगा देते हैं।